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Showing posts from June, 2019
ये रूठे हुए लोग मुझसे मनाए नहीं जाते बिन गुनाहों के सज़ा ए फरमान मुझसे माने नहीं जाते वो ख़फ़ा हैं तो ख़फ़ा ही सही उनकी नजर में मैं गलत हूँ तो गलत ही सही अपनी सफाई में सबूत पेश किए नहीं जाते ये रूठे हुए लोग मुझसे मनाए नहीं जाते रूक जाओ न, मत जाओ छोड़ कर ये मिन्नतें मुझसे की नहीं जाती ये मतलबी नजदीकियाँ अब मुझसे सही नहीं जाती यूँ मांग मांग के साथ अब मुझसे निभाए नहीं जाते ये रूठे हुए लोग अब मुझसे मनाए नहीं जाते  जज्बातों के खेल मुझसे खेले नहीं जाते हाथ थाम कर फिर छोड़े नहीं जाते बिना बात के बेवजह बेबुनियाद ही रूठे हुए लोग मुझसे मनाए नहीं जाते
कुछ ख्वाब अभी बाकी हैं कुछ कहानियां भी लिखनी हैं कुछ ज्यादा गलत समझती है दुनिया उसकी गलतफहमियां मिटानी हैं कुछ राहों पर अक्सर वो मुझे कहती है "छोड़ो तुमसे नहीं होगा, जाने दो" अभी उन्हीं राहों पर मंजिलें बनानी बाकी हैं कुछ डगमगाए कदमों का अभी चलना बाकी है चलकर मंजिल तक जाना अभी बाकी है कुछ ख्वाब अभी बाकी हैं कुछ कहानियां भी लिखनी है तूफानों को झुकाना अभी बाकी है कश्ती का किनारों से मिलना बाकी है हारी हुई जंग का जीतना अभी बाकी है रूठे हौसलों को मनाना बाकी है उन्हीं हौसलों से आसमान छुना बाकी है आसमान पर नाम लिखाना अभी बाकी है कुछ ख्वाब अभी बाकी हैं कुछ कहानियां अभी नई लिखनी हैं
बहुत सुन ली सबकी अब खुद की भी सुन लेने दो हाँ, उम्मीदों की भनक है मुझे मगर अब खुद की भी खन -खन सुनने दो नाराज बैठी है ज़मीर मेरी थोड़ा उसे भी मना लेने दो बहुत सुन ली सबकी अब खुद की भी सुन लेने दो कुछ ख्वाबों की शिकायतें हैं कुछ जज्बातों से मुलाकातें वो रटी-रटाई बंदिशें तोड़ लेने दो कुछ मुलाकातें और शिकायतें सुन लेने दो उन शिकायतों का भी हक़ बनता है ज़रा खुद की अदालत में हाज़िर होने दो बहुत सुन ली सबकी अब खुद की भी सुन लेने  दो दुनिया तो कुछ कहती ही रहती है कभी खुश तो कभी नाराज ही रहती है उसकी नाराजगी का कोई तुक नहीं होता उसकी मान  लो तब भी वो परेशान है ना मानो तो बात ही कुछ और है कमियां ढूंढ़ने का शौक है उसका उसे कमियों में ही उलझे रहने दो बहुत सुन ली सबकी अब खुद की भी सुन लेने दो।