बहुत सुन ली सबकी
अब खुद की भी सुन लेने दो

हाँ, उम्मीदों की भनक है मुझे
मगर अब खुद की भी खन -खन सुनने दो
नाराज बैठी है ज़मीर मेरी
थोड़ा उसे भी मना लेने दो
बहुत सुन ली सबकी
अब खुद की भी सुन लेने दो

कुछ ख्वाबों की शिकायतें हैं
कुछ जज्बातों से मुलाकातें
वो रटी-रटाई बंदिशें तोड़ लेने दो
कुछ मुलाकातें और शिकायतें सुन लेने दो

उन शिकायतों का भी हक़ बनता है
ज़रा खुद की अदालत में हाज़िर होने दो
बहुत सुन ली सबकी
अब खुद की भी सुन लेने  दो

दुनिया तो कुछ कहती ही रहती है
कभी खुश तो कभी नाराज ही रहती है
उसकी नाराजगी का कोई तुक नहीं होता
उसकी मान  लो तब भी वो परेशान है
ना मानो तो बात ही कुछ और है

कमियां ढूंढ़ने का शौक है उसका
उसे कमियों में ही उलझे रहने दो
बहुत सुन ली सबकी
अब खुद की भी सुन लेने दो।