नाराज़ तो जिंदगी
उस खुदा से भी नहीं है
तो तुमसे क्यों होगी

नाराज तो जिंदगी
इन गमों  से भी नहीं है
तो नज़रअंदाज़ी से क्यों होगी

जिंदगी तो बस  एक नदी की तरह
 बहती चली जाती है
कोई मिले  या न मिल
कोई पूछे या न पूछे
ये तो बस अपना रास्ता बनाये चली जाती है

नाराज तो जिंदगी
दुनिया से भी नहीं है
तो ठोकरों से क्यों होगी
ठोकरें  तो सिर्फ सिखाने आती है
मगर ये दुनिया
तो गिरा के भी उठाने नहीं आती

नाराज तो जिंदगी
किसी से नहीं है
बस लोग खुद ही नाराज़ है ज़िन्दगी