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Showing posts from July, 2020
नाराज़ तो जिंदगी उस खुदा से भी नहीं है तो तुमसे क्यों होगी नाराज तो जिंदगी इन गमों  से भी नहीं है तो नज़रअंदाज़ी से क्यों होगी जिंदगी तो बस  एक नदी की तरह  बहती चली जाती है कोई मिले  या न मिल कोई पूछे या न पूछे ये तो बस अपना रास्ता बनाये चली जाती है नाराज तो जिंदगी दुनिया से भी नहीं है तो ठोकरों से क्यों होगी ठोकरें  तो सिर्फ सिखाने आती है मगर ये दुनिया तो गिरा के भी उठाने नहीं आती नाराज तो जिंदगी किसी से नहीं है बस लोग खुद ही नाराज़ है ज़िन्दगी

पता है क्या

आँसू तेरे मेरे  दिल को चीर जाते हैं पता है क्या तुझको तेरे भीगे नैन  मुझसे देखे नहीं जाते तेरा गमों से जायज़ नहीं लगता तू उदास हो तो मुझे भी अच्छा नहीं लगता पता है क्या तुझको तेरा खामोश रहना मुझसे बर्दाश नहीं होता तेरा वो हर वक्त डाँटना कभी गुस्से में सुना देना सब  कुछ मंजूर है मुझे बस तु कभी उदास मत होना चुप्पी  तेरी मुझे भी उलझा देती है पता है क्या तुझको तुझ पे ये चुप्पी बिलकुल अच्छी नहीं लगती थोड़ी मसरूफ़ रहती हूँ दिन के समय में तेरा फ़ोन न उठा  पाऊ तो ख़ुदगर्ज मत समझना क्यूंकि रात कल भी तेरी थी रात आज भी तेरी है पता है क्या तुझको तेरे आगे मैंने घड़ी कभी नहीं