नाराज़ तो जिंदगी उस खुदा से भी नहीं है तो तुमसे क्यों होगी नाराज तो जिंदगी इन गमों से भी नहीं है तो नज़रअंदाज़ी से क्यों होगी जिंदगी तो बस एक नदी की तरह बहती चली जाती है कोई मिले या न मिल कोई पूछे या न पूछे ये तो बस अपना रास्ता बनाये चली जाती है नाराज तो जिंदगी दुनिया से भी नहीं है तो ठोकरों से क्यों होगी ठोकरें तो सिर्फ सिखाने आती है मगर ये दुनिया तो गिरा के भी उठाने नहीं आती नाराज तो जिंदगी किसी से नहीं है बस लोग खुद ही नाराज़ है ज़िन्दगी
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पता है क्या
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आँसू तेरे मेरे दिल को चीर जाते हैं पता है क्या तुझको तेरे भीगे नैन मुझसे देखे नहीं जाते तेरा गमों से जायज़ नहीं लगता तू उदास हो तो मुझे भी अच्छा नहीं लगता पता है क्या तुझको तेरा खामोश रहना मुझसे बर्दाश नहीं होता तेरा वो हर वक्त डाँटना कभी गुस्से में सुना देना सब कुछ मंजूर है मुझे बस तु कभी उदास मत होना चुप्पी तेरी मुझे भी उलझा देती है पता है क्या तुझको तुझ पे ये चुप्पी बिलकुल अच्छी नहीं लगती थोड़ी मसरूफ़ रहती हूँ दिन के समय में तेरा फ़ोन न उठा पाऊ तो ख़ुदगर्ज मत समझना क्यूंकि रात कल भी तेरी थी रात आज भी तेरी है पता है क्या तुझको तेरे आगे मैंने घड़ी कभी नहीं